
पाली जिले को एक जलवायु-संवेदनशील, नीम-आधारित हरित अर्थव्यवस्था केंद्र के रूप में विकसित करना, जहाँ पारिस्थितिक पुनर्स्थापन, सतत आजीविका एवं सामुदायिक सहभागिता का समन्वय हो। वर्तमान में पाली जिले के अनेक क्षेत्र भूमि क्षरण, अनियमित वर्षा तथा वन क्षेत्र से जुड़े समुदायों के लिए सीमित आजीविका जैसी चुनौतियों का सामना कर रहे हैं। यह पहल "पौधारोपण एक गतिविधि" से आगे बढ़कर "नीम आधारित पारिस्थितिकी एवं अर्थव्यवस्था" की दिशा में कार्य करेगी।
नीम (Azadirachta indica) एक बहुपयोगी वृक्ष है जो राजस्थान की शुष्क जलवायु में सहजता से पनपता है। इसके जैविक, औषधीय एवं पर्यावरणीय गुण इसे पाली जिले के लिए आदर्श वनस्पति प्रजाति बनाते हैं।
नीम की पत्तियाँ, बीज, छाल एवं तेल जैविक कीटनाशक, जैविक खाद तथा औषधीय व कॉस्मेटिक उत्पादों के निर्माण में काम आते हैं। यह वृक्ष भूमि क्षरण रोकने, पर्यावरण शुद्ध करने एवं जलवायु अनुकूलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
पाली जिले में नीम को "एक जिला एक वनस्पति प्रजाति" के रूप में चुना गया है। इस योजना का उद्देश्य वर्ष 2026 से 2047 तक चरणबद्ध रूप से नीम आधारित पारिस्थितिकी एवं आर्थिक तंत्र विकसित करना है, जिससे समुदायों की आजीविका सुदृढ़ हो, पर्यावरण संरक्षण हो तथा पलायन में कमी आए।
नीम 100% प्राकृतिक जैविक कीटनाशक का स्रोत है। इसके उत्पादों की घरेलू एवं अन्तरराष्ट्रीय बाज़ारों में भारी माँग है। रूट ट्रेनर तकनीक से उगाए गए पौधों की जीवित रहने की दर अत्यधिक अधिक होती है। SHG एवं VFPMC के माध्यम से सामुदायिक स्वामित्व सुनिश्चित किया जाएगा।
प्रथम वर्ष में मुख्य ध्यान ऐसे तंत्र विकसित करने पर होगा जो पौधों के जीवित रहने, विस्तार एवं सामुदायिक स्वामित्व को सुनिश्चित करें।
IEC गतिविधियों एवं "वृक्ष मित्र" सहभागिता के माध्यम से समुदाय नीम को केवल एक वृक्ष नहीं बल्कि एक मूल्यवान संपत्ति के रूप में देखना शुरू करेगा।
नीम प्रसंस्करण क्षमता एवं संरचित प्रशिक्षण के माध्यम से समुदाय जैविक कीटनाशक, जैविक खाद, औषधीय एवं कॉस्मेटिक उत्पादों के निर्माण की जानकारी प्राप्त करेगा।
पौधारोपण एवं भूमि पुनर्स्थापन गतिविधियों को राज्य योजना, CAMPA एवं मनरेगा (MGNREGA) से जोड़ा जाएगा।
आजीविका गतिविधियों को NRLM से जुड़े स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से समर्थन प्रदान किया जाएगा।
स्थानीय उद्योगों की CSR सहायता का उपयोग प्रसंस्करण इकाइयों एवं प्रशिक्षण अवसंरचना के विकास हेतु किया जाएगा।
वन विभाग द्वारा तकनीकी मार्गदर्शन प्रदान कर समन्वित क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जाएगा।
जब प्रारंभिक व्यवस्थाएँ स्थिर हो जाएंगी, तब यह पहल आजीविका आधारित मॉडल में परिवर्तित होगी।
नीम सैकड़ों परिवारों के लिए अतिरिक्त आय का स्रोत बनेगा। स्थानीय स्तर पर मूल्य संवर्धन एवं प्रसंस्करण से लाभ जिले के भीतर ही रहेगा। वर्ष 2030 तक नीम केवल एक वृक्ष नहीं, बल्कि जिले की पहचान एवं आर्थिक शक्ति के रूप में स्थापित होगा।
दीर्घकाल में यह पहल पारिस्थितिकी एवं अर्थव्यवस्था दोनों में संरचनात्मक परिवर्तन लाएगी।
शुष्क क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर हरित आवरण का विस्तार। पारिस्थितिक संतुलन एवं जलवायु अनुकूलता में वृद्धि। क्षतिग्रस्त वन एवं सामुदायिक भूमि का पुनर्स्थापन।
आत्मनिर्भर नीम आधारित ग्रामीण अर्थव्यवस्था का विकास। प्रसंस्करण, ब्रांडिंग, विपणन एवं निर्यात मूल्य श्रृंखलाओं की स्थापना। पाली जिला नीम आधारित उत्पादों के प्रमुख केंद्र के रूप में उभरेगा।
पौधारोपण एवं उद्यमों के प्रबंधन हेतु मजबूत सामुदायिक संस्थाओं का विकास। स्थानीय रोजगार में वृद्धि एवं पलायन में कमी। युवाओं, महिलाओं एवं सामुदायिक समूहों की सक्रिय भागीदारी।
SDG लक्ष्यों — स्वच्छ पर्यावरण, गरीबी उन्मूलन, लैंगिक समानता एवं सतत कृषि — में पाली जिला एक अनुकरणीय मॉडल के रूप में स्थापित होगा।
| चरण | अवधि | पौधारोपण लक्ष्य | प्रशिक्षण लाभार्थी | आजीविका लक्ष्य | उद्यम/क्लस्टर |
|---|---|---|---|---|---|
| चरण 1 | 2026–27 | 1.5 लाख पौधे | 300 (SHGs, VFPMCs, फील्ड स्टाफ) | 100 परिवार | 1 प्रसंस्करण इकाई |
| चरण 2 | 2027–2030 | 2.5 लाख/वर्ष | 500/वर्ष | 1,000 परिवार | 5 क्लस्टर |
| चरण 3 | 2030–2047 | 30 लाख (दीर्घकालीन) | 1,000/वर्ष | 6,000+ परिवार | 25 उद्यम |
Roadside avenues, farms, sacred groves and village squares — neem is everywhere in Pali.